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तेरी नाराज़गी…..

झुकी नजरों को उठा कर जरा इक बार देखो!
मेरी आँखों में नज़र आएगा असीम प्यार देखो!!
ऐसी नाराज़गी क्या तुम बात क्यों नहीं करते,
तुम्हारी चुपी से डर लगता है मेरे यार देखो !!
तुम्हारा साथ है जैसे साथ हो  खिलते फूलों  का,
थमा दो हाथ आ जाएगी इक नई बहार देखो !!
तुम्हे चुप देख कर दिल पर हजारों तीर चलते है,
तुम मुस्करा दो हम हो जायें तुझ पर कुर्बान देखो!
शिकायत कर के तो देखो मैं सब कुछ सुन लूँगा,
तुम्हारी कसम, उफ़ न करूंगा मेरे दिलदार देखो!!

 तुम नाराज़ हो तो लगता है सारा जहान हो खफ़ा,

अब छोडो जिद, हंस दो मिले दिल को करार देखो!!

क्या हुआ..?

मेरे मन यह  बता तुझे क्या हुआ..?
क्यों है गमों के समन्दर में डूबा हुआ?
तुम तो सदा से हो मेरे ख्यालों में,
मैं परेशान हूँ बस अपने सवालों से,
दिल पे कैसा गुबार हैं जमा हुआ?
मेरे मन  यह  बता तुझे क्या हुआ..?
तुम हंसती थी तो मन मचलता था,
सपनों की दुनिया में दिल टहलता था,
अब मन क्यों है  यादों से डरा हुआ?
मेरे मन  यह  बता तुझे क्या हुआ..?
तुम्हारे आने से खुशबू सी छा जाती थी,
तुम्हारी बाते मेरे मन को भा जाती थी,
क्यों बीती बातों से दिल है भरा हुआ?
मेरे मन  यह  बता तुझे क्या हुआ..?
तुम मेरे पास नहीं कहीं बहुत दूर हो,
अपने हालातों से शायद  मजबूर हो,
मैं क्यों हूँ इस कशमकश में फंसा हुआ !

मेरे मन  यह  बता तुझे क्या हुआ..

उस का ख़त ….

आज उस की  तरफ  से  मेरे ख़त का जवाब आया है!
ऐसे लगता है जैसे फूलों पर फिर से शबाब आया है!!
माना कि वह गाफ़िल नहीं  दिल की बेचैनियों से,
उसके चंद हर्फों से खुशियों का इक बहाब आया है!!
बढ़ गयी है बेकरारी बेसब्री कैसे और इंतज़ार करें,
दिल की बेताबी को और बढाने का मुकाम आया है!!
तुम्हारे  प्यार की खुशबू बसी है तेरी इन चंद लाइनों में,
मुझे तेरे दिल की धडकनों का इन से एहसास आया है!!

अरमान

जिंदगी  छोटी ही सही  पर अरमान  बड़े  होते  है !
इंसान के अंदर उमीदों से भरे उफ्फान बड़े होते है!!
तमन्नायों से छूट के रह पाना होता बड़ा है मुश्किल,

उन के टूटने से जो उभर जाये ऐसे इंसान बड़े होते है!!

तोड़ो न किसी का दिल, ना किसी के जज्बात से खेलो
मुहब्बत भरे दिल के टूटने के बुरे अंजाम बड़े होते है!!
गुज़र गए जो पल दफ़न कर दो यादों  के समंदर  में,
यह मीठा ज़हर है जिस  से मरने के सामान  बड़े होते है!!
 

टूटे दिल  को टूटा रहने दो,फिर से तोड़ने को मत जोड़ो

टूटे दिल के बार बार जुड़ने के कम आसार बड़े होते है!!

अमीर खुसरो

Amir Khusro

अमीर खुसरो का नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा, आज उन्ही की कुछ रचनाये पेश कर रहा हूँ:

ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उलटी वा की धार,
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार.

Translation
Khusro! the river of love has a reverse flow
He who floats up will drown (will be lost), and he who drowns will get across.

सेज वो सूनी देख के रोवुँ मैं दिन रैन,
पिया पिया मैं करत हूँ पहरों, पल भर सुख ना चैन.

Translation

Seeing the empty bed I cry night and day
Calling for my beloved all day, not a moment’s happiness or rest.

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके
प्रेम भटी का मदवा पिलाइके
मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ
बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा
अपनी सी रंग दीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
खुसरो निजाम के बल बल जाए
मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके

Translation
You’ve taken away my looks, my identity, by just a glance.
By making me drink the wine from the distillery of love
You’ve intoxicated me by just a glance;
My fair, delicate wrists with green bangles in them,
Have been held tightly by you with just a glance.
I give my life to you, Oh my cloth-dyer,
You’ve dyed me in yourself, by just a glance.
I give my whole life to you Oh, Nijam
You’ve made me your bride, by just a glance.

तेरी परछाई….

तूं नहीं हैं मगर तेरी परछाई खड़ी है!
बात कुछ नहीं फिर भी ये बात बड़ी है !!

खामोश सी है, कुछ बात यह नहीं करती,
नाराज़ सी है कुछ,  जैसे मुझ से लड़ी है !!

घंटों और पहरों यह मुझ से बातें करती है,
यादों को जिंदा रखने की अजब सी कड़ी है!!

बहुत तेज़ रफ़्तार है रेखाहीन जिंदगी की,
तेरी परछाई बीच में दीवार बन के खड़ी है !!

प्यार परिवरतन न सही अधिकार तो मांगता है
तेरी याद दिल के किसी कोने में आज तक गडी है!!

तुम तो यहाँ नहीं हों, हाँ यह मेरे साथ ही रही है,
तुम से बढ़ कर मेरे लिए तेरी परछाई ही बड़ी है!!

दबे पांव …

इक दिन तुम हलके से, दबे पांव,
मेरी जिंदगी में फिर से आ जाओ !
मेरी बांहों में, मेरी धडकनों में,
मेरी सांसो में फिर से समा जाओ !!

छोड़ दो दुनिया की सारी रस्मे,
तोड़ दो यह रिश्तों की दीवारें,
आ जाओ अब आ भी जाओ,
फिर से प्यार की कस्में निभा जाओ !!

मेरी जिंदगी की सौगात हों तुम,
मेरे लिए एक कायनात हों तुम,
गुजर जायेगा यह मुश्किल सफर,
अगर तुम मेरी बाहों मे आ जाओ !!

बडी मुश्किल से मिलते हैं दो दिल,
मिलते है तो मिल जाती है मंजिल ,
आ भी जाओ तुम मेरी जिंदगी में अब,
अपने प्यार की  नदिया बहा जाओ!!

अजीब होती है ग़म-ए-मुहब्बत की रस्मे,
कुछ भी नहीं रहता है इस में अपने बस में,
जो हुआ उसे भुला, चली आओ चली आओ
मेरी दुनिया मेरे  घर को फिर से सजा जाओ

हर लम्हा जो हम जी रहे है..उसे उसे एक एक कर के इकठ्ठा करें तो एक जिंदगी तये हो जाती है. कुछ सुन्दर यादों को समेटे हुए तो कुछ खट्टी मीठी व् कडवी यादों को समेटे हुए.इन बीते लम्हों में हम कितने रिश्ते बना लेते है और कितने अपने हमे छोड़ कर अपनी मंजिल की और चले जाते है.. जैसे गाडी में बैठे सभी को अपने अपने स्टेशन पर उतर जाना होता है..कुछ ऐसे ही वह हम से बिछड़ जाते है.. कितने और सवार लोग जो हमे गाडी में मिलते है वोह अनजाने ही रह जाते हैं क्योंकि हम उन के साथ कुछ अपने लम्हे बिता नहीं पाते जा बिताने का मौका नहीं देते..हम क्यों नहीं प्यार के साथ कुछ पल कुछ लम्हे या कुछ क्षण उन के साथ बिता पाते?

जिंदगी की गाडी दौड़ती जाती है ..चाहे हम उन लम्हों को हंस कर बिता दे जा किसी से नाराज़ हो कर जा कोई बात न कर..इस के लिए कोई शिकवा जा शिकायात किसी से ना कर के अपने ही अन्दर खोजना चाहीये के हम ने वो कीमती लम्हे क्यों जाया किये..?

कुछ ऐसे ही लम्हे थे वो भी …जिस तरह से तुम मुझे पकड़ कर अपनी पकड़ खोने नहीं देना चाहती थी ..उन लम्हों में तुम्हारी एक नज़र मेरे होंठों पर बरबस ही और बड़ी आसानी से कैसे एक मुस्कान पैदा कर देती थी…अपने आप में खो जाने का इक एहसास सा दिल में जाग उठता था..जंगली तितलियों जैसे दिल में उड़ उड़ कर अपने अन्दर एक एहसास की गर्मी पैदा कर देने वाले वोह लम्हे…तुम्हारे एक कोमल स्पर्श के साथ, दिल की धड़कने जैसे धडकना ही भूल जाती थी…आँखें, सब कुछ भूल कर ..आसपास से दूर कर के किसी एक अनजानी दुनिया के सपनों में ले जाती थी ..उन लम्हों के गुज़र जाने का एहसास अभी भी क्यों बना हुआ है..

कभी तो ऐसे लगता था केवल तुम और मैं ही मेरी दुनिया में मौजूद थे …सिर्फ तुम और मैं एक साथ ..कितने मायने रखते थे वोह पल …आज भी..तुम्हारे साथ गुज़रे हुए वो लम्हे जीवन में सब से अनमोल लम्हे है..क्षण हैं..पल है..जिन्हें आज भी दिल में हमेशा के लिए लगाये रहा हूँ…वोह..पल…वोह लम्हे ..जुड़ जुड़ कर एक जिंदगी बन चुके है….यादों में है…बस!!

ब्लागरो की महफ़िल ..

यह रचना लिखने का बड़ा मज़ा आया! मैंने कोशिश की है अपने कुछ जाने पहचाने साथी ब्लागरो के ब्लाग व उनकी कुछ रचनाओं को अपनी इस ग़ज़ल में शामिल करने की! इस ग़ज़ल का मीटर सही रखना कुछ मुश्किल था फिर भी कोशिश की है. उम्मीद करता हूँ आप को पसंद आएगी!

यारो शामिल हों जाओ हम ब्लागरो की महफ़िल सजाये बैठे है!
आ जाओ खेलो अपनी रचनायों से हम  बिसात बिछाए बैठे है !!

आईये ‘समीर जी’ ‘उड़न तश्तरी’ अपनी विल्लज की कतरने ले कर
और हम सब को बताये अपने किस्से जो भाभी जी से छुपाये बैठे है !!

‘श्यामल’ जी अपनी ‘मनोरमा’ के कभी हम को भी दर्शन करवाइए,
यह कौन सी ‘खुश्बू’है जो आप अपने घर के अन्दर फैलाये बैठे है??

‘वाणी’ जी अपनी ‘ज्ञानवाणी’ से हमे कुछ उपदेश ज़रूर सुनाये,
क्यों आप अपनी खिड़की के बाहर , तिरंगा झंडा फेहराए बैठे है!!

‘दिगम्बर नासवा’ जी आप अपने सपनों की दुनिया में क्यों खोये है,
‘गुरु पंकज’ की अनुकम्पा से क्या अति सुन्दर ग़ज़लें बनाए बैठे है!!

वाह वाह ‘अनिल कान्त’  जी कसम से आप क्या ज़बरदस्त लिखते  है,
हम बेचारे सब  पाठक पढ़ पढ़ कर आँशुयों  की नदिया बहाए बैठे है,

‘निर्मला कपिला’ जी आप भी क्या खूब ‘वीरांचलगाथा’ लिखती है,
औरों के दुःख को देख अपना दुःख छोटा मान कर भुलाए बैठे है !!

‘शिखा वार्ष्णेय’ जी लन्दन से, आप की ‘सपंदन’ तो अन्तराल छूती है,
‘किस की शामत आयी है’ ? लिखती  है जैसे आप डंडा उठाये बैठे है !!

मैंने कहा ‘पी सिंह’ जी आप क्यों ‘वक़्त के हाथों तकदीरें’ सौंपे हुए है?
आप मैनपुरी से अब ग़ज़लों के लिखने की खूब धाक जमाये बैठे है!!

अब क्या कहूं ‘संजय भास्कर’ जी की अजीब ‘आदत है मुस्कराने’ की
‘न तूने कुछ कहा’ लिख कर दिल के क्या क्या राज़ बताये बैठे  है!!

‘खुशदीप सहगल’ जी क्या कमाल लिखा आप ने ‘देशनामा’ में अभी,
इसे पढ़ कर हम अपनी नयी सोच  बनाने का  इरादा बनाये बैठे है!!

मंजिल दूर तो है लेकिन….

मंजिल दूर तो है लेकिन, तुम हिम्मत कर के चलो!!
राह मुश्किल हों तो हों, तुम प्यार के रंग भर के चलो!!

जिंदगी तो सुलगती रहती है सदा कशमकश में मगर,
रोज़मर्रा की ज़दोजहद से तुम निकल उभर के चलो!!

कभी समझेगा कोई तेरी उलझनों के तानो-बानो को,
तुम इस ख्याल को अपने ज़ेहन से अलग कर के चलो!!

सुना करते थे  के जिंदगी को जिंदादिली का नाम है,
सो तुम सीना तान के जूझो और हों निडर के चलो !!

ग़मों के अंधेरों में उम्मीदों का दिया जलाये रखना,
भूल के कल की बीती बातें, आज को बना संवर के चलो!!

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