मुहब्बत को जीतना चाहिए मगर यह हार जाती हैइस अहसास के चमन में कभी ही बहार आती है
कभी खुशियाँ यह लाती है अक्सर ग़मगीन करती हैकभी चैन लाती है अक्सर सकूं छीन लेती है कभी यह फूल जैसी है कभी यह धूल जैसी हैकभी सपना सा लगती है कभी यह भूल जैसी हैजो [...]
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यह मुहब्बत
Posted in Hindi Poetry on May 2, 2008 | Leave a Comment »