पुराने बीते दीनो कीयादों में खोया थाएक पेड़ के नीचेजागा सा सोया सायाद करने लगाबीते लम्हों कोतभीएक पत्तापीला सा मुरझाया साडाली से टूट करमेरी गोद मी आ गीरता हैऔर याद दीला देता हैकुछ मधुर षानो कीजब तुम्हारे संगयहाँ बैठा करता थाहम हँसते थेऔर कभी रो देते थेऔर आजतुम नही होऔर ना ही इस पेड़ [...]
Archive for May 7th, 2008
बीते दीन
Posted in Hindi Poetry on May 7, 2008 | 2 Comments »
तुम कहती हो…..
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तुम कहती हो“तुम मुझे भूल जाओ”मैं कैसे भूल जाऊंमैंने तुम से प्यार कीया है !पहरों बैठ करतुम्हारा इंतज़ार कीया है !
तुम कहती हो“खत्म करो यहीं पर यह कहानी”कैसे बताऊंदीलो-दीमाग पे छाई हैतुम्हारे क़दमों की आहट!मील कर तुम सेदील को मीलती है कीतनी राहत !
तुम कहती हो“नहीं निभ सकेगा यह रीशता”अब कैसे समझाऊँ ?रीश्ते [...]
तुम्हारी अदा !
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शाने पे तेरे जुल्फों के घन गीरे हुएऐसे मैं जैसे अम्बर पे बादल घीरे हुए
होठों पर मुस्कराहट है फूलों सी चंचलआँखें हे जैसे जाम हो रस घोलते हुए
तेरे रुखसार पर जो एक काला सा तील हैवोही है ख़ुद से मुझ को गाफील किए हुए
होंठ हे ऐसे के जैसे खिलता हुआ गुलाबहंसने की अदा है दील [...]