यह सूखे हुए चेहरे
पड़े हुए उन पर
निराशायों के घेरे
हम से यह पूछते हैं
क्या उन से बुरा हुआ है
हम क्यों तरस न खाएं
उन के लिए भे कोई
बदली बरस तो जाए
देखो नगन खड़ा है
बच्चा सड़क पे किस का
भूख के मारे हुए
पेट खाली है जिस का
देखो वह चिल्ला रहा है
दोष [...]
Archive for May 16th, 2008
भविष्य …
Posted in Hindi Poetry on May 16, 2008 | Leave a Comment »