खंडहरों मैं घूमा करता हूँ!
मुख पे लिए उदासी,
आँखें लिए यह प्यासी,
बहते हुए आंखों से हर
आँसू को चूमा करता हूँ!
खंडहरों मैं घूमा करता हूँ!
दिल आवाज़ दिया करता हैं
ज़िक्र तेरा ही किया करता हैं
आंखों को भींच भींच कर
मैं करुणा मैं झूमा करता हूँ!
खंडहरों मैं घूमा करता हूँ!
तेरी यादें अब भी आती हैं
दिल मैं एक शोर मचाती [...]
Archive for May 20th, 2008
सीमाहीन तृषा
Posted in Hindi Poetry on May 20, 2008 | Leave a Comment »
ग़ज़ल
Posted in Hindi Poetry on May 20, 2008 | 1 Comment »
जो दिल में छुपा है दर्द हम समझा नहीं सकते!
जो ठेस जिगर पे खाई है हम दिखला नहीं सकते!
कहते थे यार हम से की हम भी कया अजीब हैं,
इस की वजह चाहें भी हम बतला नहीं सकते!
हमारा जो हाल पूछते हैं उनको यह ख़बर नहीं,
जवाब इस का जो ढूंढे तो हम पा नहीं [...]