जो दिल में छुपा है दर्द हम समझा नहीं सकते!
जो ठेस जिगर पे खाई है हम दिखला नहीं सकते!
कहते थे यार हम से की हम भी कया अजीब हैं,
इस की वजह चाहें भी हम बतला नहीं सकते!
हमारा जो हाल पूछते हैं उनको यह ख़बर नहीं,
जवाब इस का जो ढूंढे तो हम पा नहीं सकते!
उन्ह से बिछड़े हुए हमें सदियाँ ही गुजर गयी
पर याद उन्ह की दिल से हम भूला नहीं सकते!
बदनसीबी ने प्यार का दीया यूँ गुल कर दिया है,
इसे फ़िर से जलाना चाहें तो हम जला नहीं सकते!
खैर यूँ मर तो नहीं जायेंगे हम तेरी जुदाई में,
पर सकूने-मंजिल ज़िंदगी भर हम पा नही सकते!
ज़िंदा हैं किसी के गम का सहारा लिए हुए,
एह्साने-ज़िंदगी वरना अब हम उठा नहीं सकते!
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