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Archive for December, 2008

इस कहानी को लिखने का मेरा कोई खास मकसद नही था। पहले पहल सोचा करता था की दुनिया में मकसद ही सब कुछ होता है पर अब नही। अब तो यह महसूस करता हूँ की कुछ बातें बिना किसी मकसद के भी ज़िन्दगी के लिए बहुत ज़रूरी हो जाती है। खैर इस विवाद में न [...]

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दोस्ती

अपने जब नही करीब होते हैं
वोह पल बड़े बदनसीब होते हैं
दोस्त के ऐब पर नही जाते,
दोस्त किस को नसीब होते हैं
दूरी का गम ना कर ऐ दोस्त
दोस्त तो दिल के करीब होते हैं
जब हम तुम मिल के चलते हैं
वोह दिन बड़े अजीम होते हैं
गम ना कर जहाँ के बातों का
दुनिया वाले तो रकीब होते हैं
कहीं [...]

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ज़िन्दगी की कड़ियों को,
समेटना जो चाहा तो,
समेट नही पाया मैं।
लोग मिलते रहे और बिछड़ते गए।
सपने बनते रहे और सिमटते गए।
रिश्ते बनते रहे और टूटते गए।
घाव रिस कर नासूर बनते गए।
फ़िर ख़ुद को ख़ुद से,
जोड़ना जो चाहा तो,
जोड़ नही पाया मैं।
यादें आती रही और जाती रही।
एकांत में दर्द दिल में जगाती रही।
बंधन बंधते रहे और फ़िर [...]

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मेरा यह नेचुर के ऊपर एक ग़ज़ल लिखने का पहला प्रयासः है। उम्मीद करता हूँ आप को पसंद आएगी…
आज सुबह जब मेरा बाग़-ऐ-गुल से गुजर हुआ।
कुदरत के करिश्मे का दिल पे अज़ब असर हुआ।
हलकी फ़ैली थी धूप जैसे सफेद चादर का हो रूप,
ठंडी हवा चल रही थी जिस से बदन शरर शरर हुआ।
कहीं पर था [...]

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ओ पंछी! यह संदेशवा दे दो जब तुम गुजरो पी की नगरिया।
मोहे हर पल पी की याद सताए, मोरी छलक जाए है गगरिया।
वोह कहते थे के आयेंगे अब के सावन में।
एक अगन लगती जाए मोरे तन बदन में।
लगन में उनकी मीठा सा दरद है मन में।
धड़क जाए जियरा मोरा जब चमके वैरी बिजुरिया।
ओ पंछी …………………………………………………..
नैनन [...]

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शाम के झुट्पते में
जब सूरज डूबता है
सागर किनारे बैठा मैं,
उस को निहारा करता हूँ
जिस की सुनहरी किरणे
रेत पर छिटक रही है
तो लगता है मुझ को ऐसे
जैसे एक मिलन हो रहा है
जा हो रही हो जुदाई
रात और दिन की
रेत पर बैठा मैं
कमज़ोर उँगलियों से
तेरा नाम लिख देता हूँ
और फ़िर मिटा देता हूँ
कौन जाने
तेरा मेरा भी
मिलन है [...]

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मय जो हम ने मांगी साकी से पिलाई न गयी।
सामने जाम था प्यास हम से बुझाई न गयी।
क्या कहें अब जुबां ही चुप सी रहती है,
क्या करें बात, बात हम से बनायी न गयी।
जब भी गर्दन झुकाए तेरे आस्तां से गुज़रे हम,
आँख उठायी तो सही, पर आँख मिलाई न गयी।
माना के तुम भूल गए, [...]

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छोड़ा ऐसे तुम ने मुझ को, मेरा खो गया हर सहारा।
ना भुला पाया मैं तुझ को, तेरी याद ने मुझ को मारा।
दिल तब से टूट चुका है, जब से जुदा हुए तुम,
सब को मैं भूल चुका हूँ, मेरे खुदा हुए तुम,
अब तो डूबी हमारी कश्ती, मुझे तूं ही दिखा किनारा।
ना भुला पाया मैं [...]

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फ़िर तेरी याद ने इतना मुझे रुलाया है।
दर्द उतना ही बढ़ा जितना इसे दबाया है।
आंसू छलके ही रहे रोज़ मेरी आंखों से,
ज़ख्म जलते ही रहे बीती हुई बातों से,
आज यह दिन भी मुझे प्यार ने दिखाया है।
दर्द उतना ही बढ़ा जितना इसे दबाया है।
तन्हाई में मुझे फ़िर अतीत याद आता है,
जैसे दिल पे मेरे एक [...]

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मेरी तन्हाई की हमराज़
तेरी रंग भरी याद!
करती है
वीरान दिल को आबाद !
तरीक ज़िन्दगी के,
उफक को
तेरी यादों के जुगनू
रोशन करते हैं।
लेकिन
फ़िर भी
कभी यूँ ही
जाग उठती है
सहसा
वोही रूहानी प्यास।
तुम्हारे करीब
बहुत ही करीब
आने की आस।
जी चाहता है
उसी तरह
फ़िर से
गुम हो जाऊं।
के बस
ख़ुद को भी
ढूंढ ना पाऊँ।
खो जाऊं
तुम्हारी
बाहों के हिसार में।
और
भूल जाऊं
हर रंजो-गम
तेरे प्यार में।
और
तुम
फ़िर से खेलो
मेरे गेंसूओं से।
के [...]

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