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कल रात नही मैं रोया था..

पहले जब दुनिया सोती थी,
आँखें रहती मेरी रोती थी

लेकिन कल तेरे दामन में,
छुपा कर सर मैं सोया था
कल रात नही मैं रोया था

देखे थे रात मधुर सपने,
जैसे सब सुख मिले अपने,

दुःख के बादल से रहा दूर,
दूर सपनों में मैं खोया था
कल रात नही मैं रोया था

पहले तूं समझ ना पाती थी,
हार पल मुझ को तडपाती थी,

अब समझी हो दिल की बातें,
पहले नही जब मैं रोया था
कल रात नही मैं रोया था

बहाना नही पर रोने का मन हैं

कुछ बेवफा साथियों को याद कर के
टूटे दिल के लिए एक फरयाद कर के
यह देखना चाहता हूँ,
दिल के किस कोने में जलन हैं
बहाना नही रोने का मन हैं!

रह रह कर कंठ रूंध कर भर आता हैं!
दिल उछल कर कंठ में अटक जाता हैं!
ना जाने दिल के किस कोने में,
मेरे बिरहा की अगन हैं!
बहाना नही रोने का मन हैं!

अब तो बस सहा जाता नही!
मन का दुःख कहा जाता नही!

ज़र्ज़र सा हुआ मेरा तन मन,
दुखी कितना जीवन हैं!
बहाना नही रोने का मन हैं!

दिल के आईने में मेरे तेरे सिवाय कोई नही!
चाह और दिल में मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

तेरी उल्फत के लिए चैन खोया मैंने अपना,
चैन और दिल का मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

काश अपने लिए भी दर्द हो दिल में तेरे,
आरजू दिल में मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

थक चुकी हैं अब तक तक कर आँखे मेरी,
इंतज़ार दिल को मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

हम किया करते हैं अश्कों से तवाजो क्या क्या,
इन खयालात में मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

तुम को क्या कहूं सनम किस्सा--गम अपना,
मरकज़ और गम का मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

यह वही दिल हैं जो प्यार में हंसा करता था,
तड़पन इस दिल की मेरे तेरे सिवाय कोई नही!

रह गए अरमान हमारे यह सिसकते रोते,
मेरे हर एक साँस में तेरे सिवाय कोई नही!

ऐसा क्यों??


आप हम को दिल से भुलाते चले गए,
उमीदें हमारी ख़ाक में मिलाते चले गए!

हम तो सोचते थे ना भूलोंगे तुम कभी,
पर दुनिया नयी आप बसाते चले गए !

आओगे एक बार तो मिलने तुम कभी,
इस उम्मीद पे हम शम्म- जलाते चले गए !

पीते रहे हैं अशक के आए ना तेरी याद,
फ़िर भी तेरे खयालात हमे आते चले गए!

तेरी ज़फा के बदले तुम पर सनम,
दुनिया अपने प्यार की लुटाते चले गए!

यूँ ही छुपा ले जायेंगे हम दिल के दर्द को,
जिस तरह आंसू अब तक छुपाते चले गए !

ना मरोरो बैंया मेरे कन्हैया मैं तो तेरी दासी हूँ
तुम्ही तो मेरे प्रीतम हो, मैं तो तेरे रंग रासी हूँ !!

छबि तोरी बसी मन मोरे, मेरे प्यारे भोले सांवरिया,
देखूं जब तुम्हे सूझे कुछ नाही, मैं हो जाऊं बाँवरिया!

अब जाओ, मत सताओ, तेरे दर्श की प्यासी हूँ
तुम्ही तो मेरे प्रीतम हो, मैं तो तेरे रंग रासी हूँ !!

सुध बुध विसार दूँ मैं सुन तेरी बंसी की तान रे,
तुम क्यों निष्ठुर हों मेरी हालत से अनजान रे!

रिम झिम बरसे मोरे नैना, तेरे लिए मैं ना सी हूँ
तुम्ही तो मेरे प्रीतम हो, मैं तो तेरे रंग रासी हूँ !!

एक दिन मै,
अनमना सा
इस ज़िंदगी को
पिछली ज़िंदगी से
नापने तोलने लगा!

मन के उठते तूफानों को
यादों के बियाबनो से
ढूँढ ढूँढ कर
बीते लम्हों के
खोये सपनो को
आंसुओं मे घोलने लगा

कुछ पुराने बक्से टटोले,
धूल से भरी डाय्रिओं के
पीले हुए पन्ने खोले,
बीते दिनों के अक्सों को
अपने ज़हन के परदे की
परतों को खोलने लगा!

मन के किसी कोने से
निकलने लगे यादों के कई चेहरे,
उन्ह लम्हों को याद कर
जब लेह्राए थे मेरे ख़बावों के सेहरे,
राख मे दबी हुई चिंगारीओं
फ़िर से झंझोड़ने लगा!

आज मेरी आंखों मे
अतीत के साए खड़े है,
सच्चाई कड़वी लगती है
पर एहसास सब खरे है,
इन यादो को अब ब्लाग मे
लिख कर उतारने लगा!

जाम और आए साकी बहुत प्यासे हम हैं!
भर दे प्याला मेरा फिर से अभी तो पी ही कम है!

ज़िंदगी का अब क्या है दिल पुर्ज़ा पुर्ज़ा हो चुका,
शाद जितना होना था दिल ने उतना है वो हो चुका,

अब तो है पीने की तमन्ना जब तक दम में दम है
जाम और आए साकी बहुत प्यासे हम हैं!

दिल था उन का जाँ थी उन की जो ना अब अपने रहे,
जो थे अपने दिल के इरादे वो तो बस सपने रहे,

अब तो दर मैखाने का है और दिल मे गम है!
जाम और आए साकी बहुत प्यासे हम हैं!

वो ही जब अपने रहे ना औरआशुजीए तो क्या?
तुम ही बताओ मैय ना पिए और फिर पिए तो क्या?

ज़यादा ज़िद ना कर अब देख आँखे मेरी नम है!
जाम और आए साकी बहुत प्यासे हम हैं!

ग़ज़ल

मुझे तेरी फितरत देख कर रोना ही गया!
अब मुझे हर हाल मे खुश होना ही गया!

ज़रूरत नही हैं अब मुझे किसी के सहारे की,
अश्कों में ख़ुद अपने को डुबोना ही गया!

क्यों रोये आख़िर कोई मेरी दास्तान सुन कर,
अक्सर अपने हाल पर ख़ुद रोना ही गया!

शुक्रिया तेरा दोस्त तूने जीना सीखा दिया,
अब तो मुझे भी ग़मों में खोना ही गया!

वक्त--हिज़र नही करूंगा मैं कोई भी शिकवा
खुशियों के हार मुझे अब पिरोना ही गया !

यह जीवन है…

पूर्व दिशा में धीरे-धीरे सूरज की किरणे ज़मीन पर जैसे सोने का रस सा बखेर देती है..येही तो सुबह है! एक नए दिन कीएक नए जीवन की..सारा संसार इन सुनहरी किरणों से जैसे जगमगा सा उठता हैमंद मंद ठंडी बयार बहती है ..पेड़ों पर नए पत्ते और फूल खिलने लगते हैं..और बंद कलियाँ धीरे धीरे अपने घूघंट को खोल कर धीरे से अपना निवारण सुंदर चेहरा बाहर निकाल कर सूर्य देव को जैसे परनाम कर रही हो..भंव्रें कर कलियों के ऊपर मंडराने लगे हैंऔर गुन गुन की आवाज़ से एक नया संगीत वातावरण मी फैल्याए जा रहे हैरंग बिरंगी तित्ल्यों ने अपने सुंदर पंखों को खोल दिया और एक फूल से दूसरे फूल पर घूमने लगती है ..रंगों का एक अजीम सा नज़ारा पेश करती हैं ..पंछी भी अपनी चहक से एक मधुर सुरभी छेड़ कर अपने हिस्से का संगीत देने लगते है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ की तरफ़ उड़आने बहरने लगते हैअपनी चोंच से वह कभी दाने और कभी बीज दबा कर घोंसलों की और जाते हैं यहाँ नन्हें नन्हें नए पैदा हुए पंछी ज़ोर ज़ोर से चरपने की अव्वाज़ करने लगते हैंउनमे से सहसा एक पंछी की चोंच से बीज गिर कर धरती पर गिर जाता है॥

आकाश में बादल उमड़ने लगते हैं ..और देखते देखते उन में से अमृत की बूंदे छलकने लगती हैं..मिटटी को जैसे एक नया जीवन मिल जाता हैबूँद तीर की तरह से उस बीज पर भी जा गिरती है..उसे धरती की कोंख में दूर तक पहुँचा देती हैदिन बीतते हैं..अन्दर उमस बदती रहती है..गर्मी से बीज फूट पड़ता है..और फ़िर मिटटी की तह फाड़ कर अंकुर बाहर झांकने लगता हैंधीरे धीरे वह बढता हैं और एक दिन पौदा बन जाता है ..बहार ..उसे पाल पोश कर और बड़ा बना देती है ..कालांतर में वोही पौदा बढ़ कर पेड़ बन जाता है॥

बदलते मौसम इसे सजाती हैं संवारती हैं ..इस पर भी एक दिन फूल खिलने लगते हैंऔर कोय्लें उठ पर बैठ कर गीत गाने लगती हैं..और फ़िर पत्झ्ढ़ आने पर इस पर वीरानी छा जाती है..पत्ते झ्ढ़ कर गिरने लगते हैं ..सिर्फ़ एक ठूंठ रह जाता हैंपर पेड़ कभी निराश नही होतापत्झ्ढ़ को वह जीवन का अंत नही समझताउमीदों पर जीता रहता है यह जानते हुए भी के एक दिन उसे भी गिर कर ज़मीन में ही दफ़न हो जाना है..उम्मीद के दामन से लिप्त रहता हैं ..एक दिन फ़िर से बहार आती है और वह फ़िर हरा भरा हो जाता है

यही तो जीवन है

मत जाओ!

मेरे पास बेठो ज़रा,
मेरा मन अभी भरा नही!

तुझे
बाहों मे लिया नही !
प्यार भी अभी किया नही!
फिर क्यों ज़ल्दी है जाने की!
छोड़ड़ो आदत बाहाने बनाने की!

जिद करो यूँ जाने की,
अभी तो कुछ कहा नही!

पहले तुम जब आती थी!
घंटों तक ठहर जाती थी!
बातों में हम खो जाते थे!
दोनों बाँहों में सो जाते थे

अब आँखें मत तरेरों तुम
मुझ से जाता सहा नही!

रुक जाओ मुझे जी लेने दो!
नैनों के प्याले पी लेने दो!
तेरी साँसों में खो जाने दो !
मन की प्यास बुझाने दो!

मत जाओ, तद्पाओ,
तुम बिन जाता रहा नही!

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